Gajanan Maharaj Status Video Download

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श्री गजानन महाराज…

मिट्टी से माता ने देह रचाया
पिता ने गजानन नाम सुजाया,
प्रथम देवता कि बनी छवि मनोहारी
जय जय गजानन मंगलकारी…..

*झुकवूनि मस्तक तुझ्या पाऊली*

*नाम घेतो तुझे गजानन माऊली*

*वरदहस्त लाभो तुझा सकलासी…*

*सुखे ठेवा सदैव आम्हा लेकरासी..*

*॥ॐगण गण गणांत बोते॥*

Gajanan Maharaj Status

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श्री गजानन महाराज जीवनी

महाराष्ट्र में एक छोटे से गांव में परम पूज्य श्री गजानन महाराज रहते थे। जो खारे पानी को भी मीठा बना देते थे, बीमार व्यक्ति को स्वस्थ कर देते थे, गरीब लोगों की झोली खुशियों से भर देते थे, दुखियों के सभी दुख हर लेते थे, और जिन माता पिता को संतान नहीं होती थी उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी देते थे। हम बात कर रहे हैं शेगाव के संत श्री गजानन महाराज की। इन को भगवान के स्वरूप में से एक रूप माना जाता है। हालांकि आज गजानन महाराज लोगों के बीच में नहीं हैं परंतु उनके भक्त आज भी उन के चमत्कार को महसूस करते हैं, और मानते हैं कि उनके महाराज गजानन जी उन लोगों के बीच में है। शेगाव के लोग कहते हैं कि गजानन महाराज के छूने मात्र से लोगों के ऐसे भयानक रोग खत्म हो जाते थे जिसका कोई इलाज नहीं था। आज भी उनके आश्रम में लाखों की भीड़ भोजन रूपी प्रसाद के लिए जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस प्रसाद को सच्चे मन से ग्रहण करते हैं। उनके भारी से भारी पाप सेकेंडों में खत्म हो जाते हैं। आज हम आपको उनकी कहानी बताएंगे और उनके कुछ ऐसे चमत्कार भी बताएंगे जिसको विश्वास करने के लिए आपको एक बार उस आश्रम में जरूर जाना चाहिए।

संत गजानन महाराज भगवान शिव के अवतार माने जाते है। उनका जनम कब हुआ किसी को ज्ञात नहीं लेकिन ऐसा माना जाता है की फरवरी १८७८ में शेगांव में प्रकट हुए थे।

दासगनु महाराज ने गजानन महाराज पर २१ अध्याय वाली “श्री गजानन महाराज विजय ग्रंथ“ नामक मराठी किताब भी लिखी है। जिसे हिन्दू पवित्र ग्रंथ के रूप में जानते हैं और रोजाना कई लोग इस ग्रन्थ का पाठ मंदिर में या अपने घरों में करते हैं।

शेगाव के संत गजानन महाराज का इतिहास किसी को ज्ञात नहीं है। लेकिन एक किंवदंती के अनुसार,बंकट लाल अगरवाल जो एक पैसा उधारकर्ता उसने सर्वप्रथम २३,फरवरी १८७८ के दिन गजानन महाराज को बेहोश अवस्था में सड़क पर देखा था। बंकट को जब यह महसूस हुआ की यह एक संत है तो वो उन्हें अपने घर ले गए और महाराज से विनती करते हुए कहा की वो बंकट के साथ ही रहे। किंवदंती के अनुसार उन्होंने अपने जीवनकाल में कई चमत्कार किए जैसे की जानराव देशमुख को एक नया जीवन दिलाना,आग के बिना मिट्टी के पाइप को रौशनी देना,सूखे कुए को पानी से भर देना,गन्ने को अपने हातो से छिद्रण कर गन्ने से रस निकालना और एक कुष्टरोगी का इलाज करना। उनके सम्पूर्ण जीवन में किसीने भी उन्हें हाथ में कोई जपमाला धारण करते हुए किसी खास मंत्र का जप करते हुए नहीं देखा। लेकिन वो ऐसे सर्वोच्च संत है जिनका आशीर्वाद पाना ऐसी हर कोई चाह रखता है।